किले की मुसकान

एक धूप भरी सुबह थी। छोटी मीरा अपने खिलौना किले के पास खेलने गई। किला लाल, पीला और नीला था। उसके दरवाजे गोल थे और ऊपर छोटी-छोटी झंडियां लगी थीं। मीरा ने अपनी टोकरी में मीठे अंगूर रखे थे। वह बोली, “आज किले में सबको अंगूर मिलेंगे, और सब खूब हंसेंगे।”
तभी एक नन्ही मधुमक्खी भनभन करती हुई आई। उसका नाम बिन्नी था। बिन्नी ने फूलों के पास घूमकर कहा, “मीरा, तुम्हारा किला कितना प्यारा है!” फिर एक छोटा घोंघा धीरे-धीरे आता दिखा। उसका नाम गोलू था। गोलू ने अपनी पीठ पर घर जैसा खोल रखा था। वह बोला, “मैं भी किले में खेलूंगा, पर धीरे-धीरे।”
मीरा ने सबको किले के आंगन में बैठाया। उसने अंगूर धोए और छोटे कटोरे में रख दिए। बिन्नी ने अंगूर को सूंघा, गोलू ने मुसकराकर देखा, और मीरा ने कहा, “खाने से पहले हाथ साफ करते हैं।” सबने पानी से हाथ साफ किए। फिर मीरा ने एक-एक अंगूर खाया। अंगूर मीठे थे, जैसे मीठी हंसी।
थोड़ी देर बाद मीरा ने अपने पेट पर हाथ रखा। उसे लगा कि शरीर कुछ कह रहा है। मम्मी ने उसे सिखाया था, “जब पेट बताए, तब छोटी पोटी सीट पर बैठना।” किले के पास एक साफ, छोटी, नीली पोटी सीट रखी थी। मीरा बोली, “मैं अभी आती हूं। मेरा शरीर समझदार है।”
बिन्नी मधुमक्खी ने धीरे से भनभनाकर गीत गाया, “बैठो, हंसो, काम हो जाए।” गोलू घोंघा बोला, “जल्दी नहीं, आराम से।” मीरा पोटी सीट पर बैठी। उसने दीवार पर बने सूरज को देखा, अंगूर गिने, और गोलू के धीरे चलने पर हंसी। उसे बिलकुल डर नहीं लगा। सब कुछ शांत, साफ और अच्छा था।
जब मीरा का काम हो गया, उसने खुशी से ताली बजाई। मम्मी ने आकर कहा, “वाह, मीरा! तुमने अपने शरीर की बात सुनी।” मीरा ने पानी डाला, हाथ धोए, और साबुन से झाग बनाए। बिन्नी ने झाग को बादल समझा। गोलू बोला, “मैं भी हाथ धोऊंगा, भले मेरे हाथ छोटे हैं।” सब फिर हंस पड़े।
फिर किले में छोटा सा उत्सव हुआ। मीरा ने बिन्नी और गोलू के साथ अंगूर बांटे। बिन्नी ने फूलों के पास नाच किया, गोलू ने धीरे-धीरे गोल चक्कर लगाया, और मीरा ने कहा, “पोटी सीट मेरी दोस्त है।” किला मुसकराता सा लग रहा था। उस दिन सबने सीखा कि शरीर की बात सुनना अच्छा है, साफ रहना अच्छा है, और पॉटी प्रशिक्षण बहुत मजेदार है।